वह तोड़ते भारत देखा उसे मैंने न्यू इंडिया के पथ पर।
आपने महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की मशहूर कविता वह तोड़ती पत्थर देखा मैंने उसे इलाहाबाद के पथ पर तो सुनी और पढ़ी होगी याद...
जी हां खबर पक्की है सब दिहाड़ी पर हैं।
देश में बड़े दिनों बाद एक सच्ची खबर अख़बार में छपी और उसपर भी बेवजह बवाल शुरू हो गया आखिर क्या गलत कहा गया...








































