घर पर मरिये ,धरती के भगवान हड़ताल पर हैं!

जी हां अब आपके लिए यही बेहतर है कि घर पर मर जाईए क्योंकि अस्पताल में इलाज नहीं है या यूं समझिए इलाज तो है लेकिन इलाज करने वाले नहीं है ,धरती पर डाक्टर को भगवान का रूप माना जाता है लेकिन भारत भूमि की त्रासदी देखिए भगवान हड़ताल पर है और अपने लिये सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।

हालांकि यह पहली बार नहीं हुआ है ऐसा नजारा अक्सर दिखता है जब भगवान रूठ जाते हैं और हड़ताल पर चले जाते हैं मरीज़ मरते हैं तो मर जाएं उनकी बला से ,किसी का पति ,किसी की पत्नी,किसी की मां ,कोई बेटा या बेटी इलाज के बिना तड़पता है तो तड़पने दीजिए क्योंकि संवेदना नाम की कोई चीज नहीं है मौत अस्पताल के दरवाज़े पर आपको हड़ताली डाक्टर के रूप में मिल सकती है मगर परेशान मत होइए आपको आखिर हिन्दू मुसलमान वाली सियासत में अपना किरदार जो निभाना है ।

अरे आप नाराज़ मत हो क्या मैंने कुछ गलत कह दिया देखिए मुझे मारियेगा मत माफ कर दीजियेगा मैंने सच तो अब बोल ही दिया है ,आपने बंगाल की खबर तो खबरिया चैनलों पर लगातार देखी ही होंगी लगातार बताया जा रहा है डॉक्टर का दर्द किस तरह वह खौफजदा हैं और अपने लिए सुरक्षा की मांग कर रहे हैं ।कहानी आपको पता ही होगी फिर भी थोड़ी सुन लीजिए डॉक्टरों का कहना है कि मरीज़ के परिजनों ने अस्पताल में सैकड़ों की संख्या में घुसकर हमला किया और डॉक्टरों को पीटा बात यहीं खतम नहीं हुई अब आगे सुनिए हड़ताल की वजह इतनी नहीं है डॉक्टरों का कहना है राज्य सरकार हमलावरों पर उचित कार्यवाही नहीं कर रही है ।

अब आइए सियासत की नजर से इस घटना को देखते हैं हमलावर भीड़ मुसलमानों की थी इसलिए वोटबैंक पॉलिटिक्स के चलते ममता सरकार कार्यवाही नहीं कर रही कुछ समझे मै जानता हूं आप नासमझ बने रहने में अपनी बुद्धिमत्ता समझते हैं।लोकसभा चुनावों से अभी तक बंगाल नफरत का नया अखाड़ा बन कर उभरा है और यह उसकी एक बानगी भर है ,खैर सियासत अपनी जगह हम बात कर रहे हैं मरीज़ और डॉक्टर की जहां मरीज़ के लिए डॉक्टर मसीहा होता है वहीं डॉक्टर आज हड़ताल पर हैं।

मै आपसे एक सवाल करता हूं इसे आप हरगिज़ यूं न समझ लीजिएगा कि मै डॉक्टरों के खिलाफ हूं और उनके विरूद्ध हुई हिंसा का समर्थक मै व्यक्तिगत रूप से किसी भी प्रकार की हिंसा का घोर विरोधी हूं लेकिन आपसे सवाल जरूर कर रहा हूं कि क्या आप डॉक्टर की हड़ताल के समर्थन में हैं ? क्या सिर्फ यही एक रास्ता है कि मरीजों की जान के बदले अपनी मांगों को मनवाया जाय?

आइए अब दूसरे पहलू पर आते हैं देश में डॉक्टरी पेशा जिस तरह अपनी गरिमा खो रहा है क्या वह किसी से छुपा है ? मानव अंगों की तस्करी हो, गरीबों से उगाही हो,लाशों तक के सौदागर डॉक्टर आपकी नजर में भी हैं कहिए मै सही कह रहा हूं कि नहीं ? सिर्फ पैसों के लिए जानों से खिलवाड़ करने वाले अस्पताल कुकुरमुत्तों की तरह हर शहर में हैं लेकिन क्या कभी हमने या आपने सड़क पर उतर कर इनका विरोध किया ?

नकली और फर्जी की महंगी दवा का मामला हो ,जांच में कमीशन का खेल ,खून का अवैध धंधा हो आप सब जानते हैं लेकिन क्या आप या हम इसके खिलाफ खड़े हुए ? जी नहीं  पूरे देश में एक आध घटना होती है जब मरीज़ के परिजन हिंसा करते हैं लेकिन अस्पतालों में हर पल जो हिंसा हो रही है आपसे छुपी नहीं है किसी भी सरकारी अस्पताल में १००% दावा नहीं किया जा सकता कि यहां मरीजो से दुर्व्यवहार नहीं किया जाता यहां तक की मारपीट की जाती है जिसे हम और आप सहने को मजबूर हैं , मैं यह सब डॉक्टरों पर हमले को जायज़ बताने के लिए नहीं कह रहा हूं बस आइना दिखा रहा हूं क्योंकि मैं दोनों तरफ की हिंसा का विरोध करता हूं।

बड़े बड़े पांच सितारा होटलों जैसे अस्पताल जिस तरह मरीजों की मजबूरी का जैसे फायदा उठा रहे हैं आप क्या नहीं जानते ?

ऐसे में आप क्यों नहीं सड़क पर आते और सरकार से मांग करते की इस पर रोक लगे ,नहीं हम कुछ नहीं करेंगे हम सियासत का मोहरा जो है।हमें अपनी ज़िन्दगी और मौत से क्या मतलब हमारे लिए राजनीत सर्वोपरि है।आपको पता है क्या कि इलाज में लापरवाही करने पर डाक्टर के विरूद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 304-A में मुकदमा पंजीकृत हो सकता है जो गैरजमानतीय है लेकिन कितने लोग ऐसा करते हैं सबकुछ जानकर भी खामोश रहते हैं लेकिन फिर भी डॉक्टर साहब को खतरा है । आइए अब देश की सरकारों का तौर तरीका देखिए आप जानते ही होंगे देश के अर्धसैनिक बल हड़ताल नहीं कर सकते यहां तक की संविधान के अनुच्छेद 33 एवम् 34  के अनुसारआपातकाल में उनके मौलिक अधिकारों की स्थगित करने का अधिकार भी सरकार को है लेकिन उतना ही अहम तो है डॉक्टर भी क्योंकि उसके काम न करने से देश को भयानक समस्या का सामना करना पड़ सकता है लेकिन उसके लिए कुछ भी नही ,आखिर क्यों ?

यह सवाल आपकी आने वाली नस्लों के लिए भी है चलिए हर अस्पताल में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी जाए डॉक्टर को सुरक्षा ज़रूरी है लेकिन जनता भी मारी नहीं जाएगी इसके लिए क्या करेंगे जिल्लेइलाही ? आप जागेगें या राजनीत के मूड में है बंगाल में सरकार किसी की भी बने लेकिन मरने वाले आप और हम होंगे क्या आप सहमत हैं ?

हम पीड़ित डॉक्टरों के साथ हैं लेकिन गरीब मरीजों के साथ भी खड़े हैं हम न डॉक्टर के खिलाफ हिंसा के समर्थन में हैं न ही मरीजों के विरूद्ध चिकित्सीय हिंसा के पक्ष में आप बताइए आप क्या कहते हैं ? आपका फैसला क्या है ? तब तक घर पर मरिए क्योंकि धरती के भगवान हड़ताल पर है।।।।।

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