
काक्रोच बचायेंगे बीजेपी का गुजरात ?
देश ही नहीं पूरी दुनिया में वर्चुअल पार्टी काक्रोच जनता पार्टी की धूम है जिधर देखिए उसी का चर्चा उसी की बातें कहीं आशंका कहीं गुस्सा और कहीं जोश जुनून युवाओं में तो मानो पागलपन जैसा छाया है अचानक से भारत के मुख्य न्यायाधीश भारत के युवाओं को काक्रोच कहते है हालांकि वह इसकी सफ़ाई में कहते हैं कि उन्होंने यह बात “उन वकीलों के लिए कही थी जोकि फ़र्ज़ी तरीक़े से या आपराधिक रूप में न्यायालय में आते हैं “खैर जो भी था लेकिन इतनी तेज़ी से उसपर प्रतिक्रिया का आना फौरन मीम बनना नए गाने बनना नए वीडियो बनना और सोशल मीडिया पर एक आंदोलन का रूप लेना और उसमें तेज़ी से लोगों का जुड़ना कहीं न कहीं हैरत में डालता है ।

हालांकि यह AI का दौर है यहाँ बहुत कुछ सेकेंड्स में हो सकता है जिसे करने में पहले घंटों लगते थे लेकिन इतना रणनीतिक रूप से होना हरगिज़ AI का काम नहीं हो सकता ।
संदेह पैदा करने के लिए इतना ही नहीं इसके फाउंडर या यूं कहें इस आंदोलन को शुरू करने वाले अभिजीत दीपके का अमेरिका में होना और पूर्व में आम आदमी पार्टी के लिए कैंपेन डिजाइन करने वाली टीम में होना है ,

जिस तरह से इस काक्रोच आंदोलन ने रफ्तार पकड़ी है उसने एक बार अन्ना आंदोलन की याद ताज़ा करा दी है इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर तले चला यह आंदोलन कैसे मनमोहन सरकार की विदाई का कारण बना और किस तरह ज़मीन पर न होने के बावजूद ज़मीन पर पूरा आंदोलन दिखाई दिया वह अपने आप में बहुत बड़ा खेल था ।

आंदोलन की कोख से फिर आम आदमी पार्टी निकली लेकिन आंदोलन ने बीजेपी को देश की सत्ता दे दी। अब जब बीजेपी की नाकामिया लोगों को दिखने लगी हैं और नफ़रत का ब्रह्मास्त्र भी अपनी मारक क्षमता खोने लगा है ऐसे में वैश्विक ऊर्जा संकट ने भारत में जिस तरह महंगाई बढ़ा दी है वहीं भारत की विदेश नीति को भारत में ऊर्जा संकट की वजह माना जा रहा है और अमरीका से हुई ट्रेड डील भी हलक में फँसा हसिया बन गई है यह सारे कारण जाति धर्म वाली राजनीत पर भारी पड़ रहे हैं उसपे सोने पर सुहागा पेपर लीक है जिसने युवाओ में ग़ुस्सा बहुत बढ़ा दिया है ,बेरोज़गारी, महंगाई और भविष्य को लेकर अनिश्चितता यह सब वह कारण है जिसने बीजेपी को सहमा दिया है ।

दूसरी तरफ़ धीरे धीरे देश की प्रमुख राजनैतिक क्षेत्रीय पार्टियो के पतन से सीधा मुकाबला कांग्रेस बनाम बीजेपी बनता जा रहा है और यही वह कड़ी है जहाँ बीजेपी मात खा सकती है क्योंकि कांग्रेस से सीधे मुकाबले में बीजेपी का जीतना मुश्किल होगा अभी तक उसकी जीत को आसान करने वाली क्षेत्रीय पार्टियों के मुक़ाबले में लगभग हाशिए पर जाने से बीजेपी को बड़ा नुक़सान तय है ।
अब बात करते हैं अगले वर्ष होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावो की जिसमे बीजेपी का सबसे बड़ा किला गुजरात भी है ।
पिछले विधानसभा चुनावो में गुजरात में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस को बड़ा डेंट लगाया था और उसे सत्ता के वनवास से वापिस नहीं आने दिया था लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी की धमक कम हुई है और अब वह सीधे मुक़ाबले से लगभग बाहर है ऐसे में लड़ाई बीजेपी बनाम कांग्रेस सीधी बन रही है दूसरी तरफ़ राहुल गांधी की लोकप्रियता भी लगातार बढ़ रही है और अब लोग उन्हें सीरियस लेने लगे है ,अब जब हालात बदले हैं तो गुजरात में परिवर्तन भी संभव है जोकि बीजेपी के लिए डाउनफॉल की घोषणा साबित होगा ।

यही वजह है कि बीजेपी गुजरात में हर हथकंडा अपनाने को तैयार है और ऐसे में काक्रोच जनता पार्टी संजीवनी बन सकती है अगर यह वर्चुअल आंदोलन ज़मीन पर एक राजनैतिक पार्टी का रूप लेता है तो यह सीधा कांग्रेस की संभावनाओं पर प्रहार होगा और बीजेपी के लिए फायदेमंद क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के पास अपना सॉलिड आधार जो अब 35 प्रतिशत तक लगभग पहुंच चुका है अगर यह नवनिर्मित पार्टी चुनाव में आती है तो यह बीजेपी से नाराज़ वोटर जोकि कांग्रेस की झोली में जा सकते थे इन्हें अपनी और आकर्षित कर लेगी और अंतिम परिणाम कांग्रेस की हार होगा और बीजेपी अपना किला बचा पाने में कामयाब हो सकती है अगर बीजेपी गुजरात नहीं भी बचा पाती तो भी कांग्रेस के हाथ कुछ नहीं लगने वाला ।
दिल्ली में जिस तरह आम आदमी पार्टी को मौका मिला और कांग्रेस दौड़ से बाहर हुई और वापिस बीजेपी ने सत्ता पर क़ब्ज़ा किया ऐसा गुजरात में भी हो इसमें कोई बड़ी बात नहीं होगी ।
यहाँ एक बात ज़रूर याद रहनी चाहिये कि अन्ना आंदोलन के पीछे भी संघ था !
यह ज़रूरी नहीं कि जैसी आशंका हो ऐसा ही हो लेकिन जब तक यह आंदोलन वास्तविक ज़मीन पर उतरकर सत्ता के ख़िलाफ़ संघर्ष करता नहीं दिखता विश्वास करने में सावधानी आवश्यक है क्योंकि छलावा घातक हो सकता है भारतीय लोकतंत्र के लिए भी और आपके लिए भी ।







