ग़रीब इंसान नहीं होते ????

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मैंने कौन सा ऐसा कुछ नया कह दिया जो आपको ग़ुस्सा आ गया यह तो स्थापित सत्य है बल्कि आपके झूठों में दबा रहने के बाद भी जगह जगह से खुल जाता है और दिख ही जाता है अरे जिसकी ज़िंदगी मौत से बदतर है उसके इंसान होने या न होने की बहस ही बेमाना है ।

हाँ उसका ज़िक्र होता है चुनाव में जब उसके ऊपर की गई कृपा गिनायी जाती है दया का सागर जोकि सत्ता के शीर्ष से ख़ास उसके लिए उँडेला जाता है उसका बखान होता है तब उसे कभी कभी ऐसा भ्रम हो जाता है कि शायद वह भी इंसान है जबकि यह मात्र कल्पना भर ही होती है खुली हुई आँखों से देखा गया ख़्वाब जैसी ही चुनाव ख़त्म वास्तविकता सामने आ जाती है !
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चुनाव समाप्त हुए ट्रेन दुर्घटना में लोग मरे आपने कहीं आवाज़ सुनी आज हाथरस में सैकड़ों की संख्या में लोग काल के गाल में समा गये मगर नेशनल मीडिया आपको आपके लोकप्रिय प्रधानमंत्री का भाषण सुनाता रहा जब तक भाषण पूरा नहीं हो गया आपने कोई खबर देखी ? हालाँकि यह बिलकुल सही भी था क्योंकि प्रधानमंत्री जी राष्ट्रवाद की बात कर रहे थे उन्होंने आज राहुल गांधी को करारा जवाब दिया है अब हाथरस के पीड़ितों को प्रशासन या पुलिस के अधिकारी कोई जवाब नहीं दे रहे तो प्रधानमंत्री जी का क्या क़ुसूर ?

अब सोचिए जरा जब लोग देश के सबसे बड़े नेता का भाषण छोड़कर किसी और को सुनने जा रहे हैं तो भला ऐसा हादसा हुआ तो गलती लोगों की हुई ?मैं सही कह रहा हूँ न ? उधर बेचारे प्रधानमंत्री जी सदन में ऐसी भयानक उमस में धर्म की रक्षा कर रहे थे इधर यह लोगों ने कर दिया ख़ुद सोचिए प्रधानमंत्री जी क्या क्या करे भला एक तरफ़ राहुल गांधी ने कल इतना बड़ा हमला कर दिया पूरे समाज पर तो समाज की रक्षा कौन करेगा ? आपका जवाब भी वही है जो मेरा है बिलकुल प्रधानमंत्री जी ही करेंगे और मीडिया का परम कर्तव्य है कि उनका भरपूर साथ दे इस धर्मानुष्ठान में क्योंकि गरीब का क्या है मरते ही रहते हैं है न ?
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ट्रेन एक्सीडेंट में मारे जायें या रोड एक्सीडेंट में पुलिस की हिरासत में मारे जायें या मॉब लिंचिंग में गरीब की मौत शोक का विषय नहीं हो सकती और वह भी उस मंगल बेला में जब देश के धन कुबेर के घर में शादी का मंडप सज गया हो ऐसे में भला राष्ट्रीय खबरों में रोने बिलखने की आवाज़े सुनाई जायें यह घोर अन्याय है भला क्या देश के नये मालिक अब इतना अधिकार भी नहीं रखते कि बिना इन ग़रीबों की चीख पुकार सुने अपने घर में मंगल कार्य कर सकें ख़ुशियों की बेला है और फिर ऐसे व्यक्ति को दूल्हा बनना है जिसे जानवरों से अपार प्रेम हैं आपने कहीं इससे मतलब गरीब तो नहीं समझ लिया तो सुनिए ऐसी गलती मत कीजिएगा मैं सचमुच वाले जानवरों की बात कर रहा हूँ जिन्हें आम आदमी द्वारा पालना या पालतू बना के रखना भारत के क़ानूनों के हिसाब से अपराध है समझें !
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अस्पताल में बिना ऑक्सीजन के मरे या सड़क पर भूख से अपनी लाश अपने काँधे पे ढोए या घसीट के ले जाये यह कोई चिंता का विषय नहीं है क्योंकि जो लोग ज़िंदा ही नहीं हैं उनकी मौत कैसी ? आप फिर मुझसे ख़फ़ा हो रहे हैं आपके चेहरे के भाव बता रहे हैं कि आपको ग़ुस्सा आ रहा है तो परेशान मत होइए मेरा कोई मक़सद नहीं है आपको दुखी करने का भारत की क्रिकेट टीम ने टी20 वर्ल्ड कप जीत लिया है कितनी ख़ुशी की बात है हम विश्व विजेता बन गये हैं इससे अधिक ख़ुशी की बात क्या हो सकती है तो फिर कैसा विलाप इन मौतों पर यह तो मरा ही करते हैं ??भला बताइये अभी ढंग से जश्न भी नहीं मना पाए यह गरीब लोग रंग में भंग डाल दिये न ख़ुद ख़ुश रहते हैं न रहने देते हैं ग़रीब कहीं के ??

लेकिन एक बात तो है यह मौतें नीट परीक्षा सहित जितने भी पेपर लीक कांड हैं उनका कुछ दिन का आवरण ज़रूर बन सकती हैं चलो यह गरीब देश के कुछ काम तो आए मर कर ही सही इन्होंने अपना राष्ट्र के प्रति कर्तव्य तो निभाया क्यों ?
वैसे मैं प्रधानमंत्री जी के देश के लिए किये जा रहे त्याग का क़ायल हूँ वह कितनी मेहनत करते हैं देश को आगे ले जाने के लिए लेकिन यह विपक्ष उन्हें काम ही नहीं करने दे रहा है हर मामले में अड़ंगा अरे नौकरी नहीं मिल रही है पेपर लीक होने की वजह से तो सरकारी ख़ज़ाने पर बोझ भी तो नहीं पड़ रहा है इसे कास्ट कटिंग मैनेजमेण्ट कहते हैं लेकिन यह अज्ञानी लोग समझते नहीं सिर्फ़ हो हल्ला करते हैं और गरीब युवाओं की बातों का मुद्दा बनाते हैं अरे जिनकी ज़िंदगी और मौत कोई मायने नहीं रखती उनकी किसी बात का क्या मुद्दा बनाना भला क्यों ?
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इस संकट की घड़ी में जब राहुल गांधी ने देश के बहुसंख्यक समाज पर कथित रूप से ही सही या भ्रमित करने वाले ढंग से प्रचारित वक्तव्य दिया है तो प्रधानमंत्री का परम कर्तव्य था उनको मुँह तोड़ जवाब देना और उन्होंने पूरे साहस और क्षमता के साथ ऐसा किया जिसके लिये वह प्रशंसा के पात्र हैं पेपर लीक कोई मुद्दा नहीं है जिसपर वह बात करें यह देश की संसद है कोई पुलिस थाना नहीं जिसमें जाँच पड़ताल और सज़ा की बात की जाये लेकिन यह विपक्ष नहीं समझेगा ?
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गरीब जन्मता ही सिर्फ़ मरने के लिए है इसलिए बस इतना कहना काफ़ी है कि घटना दुखद है वैसे इन ग़रीबों की मौत की ज़िम्मेदारी भी इनकी ख़ुद की है क्योंकि अंधविश्वास में क्यों फँसे जब देश के प्रधानमंत्री ने ख़ुद गारंटी दी है तो कहीं और क्यों भटके ?मुझे लगता है मरने के बाद भी इनपर मुक़दमा चलाया जाना चाहिए अपनी ही हत्या के लिए और अगर इनके पास अपने मकान हों तो तुरंत बुलडोज़र की कार्यवाही की जानी चाहिए क्योंकि गरीब के मकान अवैध ही होते हैं उसे गिराने के लिए जाँच पड़ताल की ज़रूरत नहीं होती क्यों ?
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मैं देश के प्रधानमंत्री उनकी सरकार के साथ हूँ और जब देश प्रगति के पथ पर अग्रसर है और ख़ुद प्रधानमंत्री जी और उनकी सभी राज्यों की सरकारें अथक प्रयास कर रही हैं तो ऐसे में देश को भटकाने वाली हर बात की निंदा करता हूँ ! ऐसे में इन लाशों पर समय बर्बाद करना देश का समय बर्बाद करना है और वैसे भी गरीब की बात क्यों हो कोई चुनाव थोड़े ही चल रहा है जब चुनाव आयेंगे तब गरीब की बात कर लेंगे अभी वर्ल्ड कप जीतने की ख़ुशी मनाइए यह सब होता ही रहता है ग़रीब की मौत उसकी रिहाई होती है इस क़ैदखाने से यह अलग विषय है गंभीर भी और इसे समझने के लिए दिल की ज़रूरत है धूर्तता की नहीं !
विनम्र श्रद्धांजलि
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