योगी की बात सही आतंकवाद को बढ़ा रहा हलाल सर्टिफिकेशन??

आपका दिल एक बार फिर मुझे गाली देने को मजबूर हो गया होगा और होना भी चाहिए क्योंकि मैंने उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी के उस कथन का समर्थन किया है जिसमे आपके हिसाब से उन्होंने मुसलमानों के ख़िलाफ़ बात करते हुए प्रदेश में हलाल सर्टिफिकेशन को बंद करने की बात करते हुए इसके द्वारा अर्जित धन जोकि उनके अनुसार लगभग 25000 क़रोड़ बनता है उसके आतंकवाद को फलने फूलने में खर्च होने की बात कही ।
आप सोच रहे होंगे भला इस शक्स को कौन सा दौरा पड़ा गया क्यों यह मुसलमानों के ख़िलाफ़ दिए जाने वाले बयान का समर्थन कर रहा है तो आइए समझिए हमारे यशस्वी मुख्यमंत्री जी की बात का मैं क्यों समर्थन कर रहा हूँ और आप लोगों से भी इसके समर्थन में उतरने को क्यों रहा हूँ ?

जरा सोचिए आप जिस मज़हब को मानते हैं उसमे गोश्त के अलावा कौन सी चीज़ है जिसमे आप हलाल का सर्टिफिकेट देखने के लिए मज़हबी तौर से बाध्य हैं? हाँ इस्लाम मज़हब माले हराम से सबसे पहले बचने की ताकीद करता है और इसके लिए कोई सर्टिफिकेशन नहीं मौजूद है जो आपको यह बता सके कि रिज़्क हराम का है या हलाल का, तो अब इसके बाद बचा सिर्फ़ गोश्त तो उसे खाने के ख़रीदने के पकाने के जो भी जायज़ शरई तरीक़े हैं उससे मुसलमान बखूबी वाक़िफ़ है और उसे इस बात के लिए किसी सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं रही ,बात दवा वैगैरह की तो इस्लाम ने इसमें पूरी तरह छूट दे रखी है कि जान बचाने के लिए मुसलमान उन चीज़ों को इस्तेमाल में ले सकता है दवा के तौर पर जो उसके लिए आमतौर पर हराम है जिसमें अल्कोहल और सुअर की चर्बी भी शामिल है जिसे मुसलमान आम दिनों में सही हालात में नहीं खा सकता ।
खैर यह सब मसले मसायल तो मुफ़्ती और मौलवी हज़रात आपको बेहतर बतायेंगे मैंने यूँहीं सरसरी तौर पर इसका ज़िक्र कर दिया तफ़सील के लिए इस्लाम के जानकारों से राब्ता किया जा सकता है ।अब उस बात पर आते हैं कि जब भारतीय मुसलमान को किसी हलाल सर्टिफिकेट की ज़रूरत नहीं बची तो यह किसके लिए है ?
साबुन ,मेकअप ,चिप्स इन सब चीज़ो पर इसका क्या काम ? दरअसल यही है खेल है जिसे समझने के बाद आप खुल कर मुख्यमंत्री जी के साथ खड़े होंगे !

दरअसल यह सारा खेल निर्यात का है ,देश से इस्लामी देशों में बहुत सी खाने पीने की चीज़े निर्यात की जाती है और इन देशों में हलाल सर्टिफिकेट ज़रूरी है साथ ही देश का सबसे बड़ा निर्यात बीफ जोकि इन इस्लामी देशों में जाता है वहाँ इसे बिना हलाल सर्टिफ़िकेट के नहीं भेजा जा सकता ।
भारत में सरकार हलाल सर्टिफिकेट जारी नहीं करती है. कुछ इस्लामिक संस्थाओं की तरफ से इस तरह के सर्टिफिकेट जारी किए जाते हैं, जो वाणिज्य मंत्रालय के तहत आती हैं. इन संस्थाओं में हलाल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और जमीयत उलेमा ए हिंद हलाल ट्रस्ट भी शामिल है. इन संस्थाओं से प्राइवेट कंपनियां अपने सामान के लिए हलाल सर्टिफिकेट लेती हैं, जिसके लिए उन्हें फीस भी देनी होती है. इसमें आवेदन शुल्क के अलावा लोगो प्रिंटिंग से लेकर लैब टेस्टिंग और ऑडिट फीस शामिल होती है.
यह सारा कुछ मिलाकर लगभग 2 लाख रुपए का खर्च आता है और इसका लगातार रिनीवल भी कराना होता है अब इसका गुणा गणित आप लगाइए कि मुसलमानों की हमदर्द यह तंज़ीमे हलाल सर्टिफिकेट के ज़रिए कितना माल पीट रही हैं और इनका क्या उपयोग क़ौम के हालात सुधारने के लिए कर रही हैं ? क्योंकि इस तरह का सर्टिफिकेट आपको पतंजलि से लेकर केएफसी तक हर जगह देखने को मिल सकता है ।

आप आए दिन एक खबर सुनते आ रहे होंगे कि देश से प्रसंस्कृत मीट के निर्यात करने वालो में अधिकतर जैन समुदाय के लोग हैं या फिर ख़ुद को सनातनी कहलाने वाले ,मुसलमान लगभग नगण्य हैं और दिलचस्प बात यह है कि इन सारी कंपनियों के नाम अरेबिक हैं! मैं इस्लामी नहीं कह रहा जिससे अधिकतर लोग धोखा खाते हैं और इन कंपनियों को मुसलमानों का समझते हैं यह वही कंपनियों है जिनका स्वामित्व से लेकर प्रशासन सब मुसलमानों के हाथ में नहीं होता और यहाँ कटने वाले मांस को हलाल सर्टिफिकेट जमीयत जैसी तंज़ीम देती है अब यह किस क़दर हलाल होता है यह मैं नहीं कह सकता ।

इन स्लॉटर हाउस में किसी जानवर को छूरी से हलाल करना और हलाल करते वक्त जो बिस्मिल्लाह अल्लाहूअकबर पढ़ा जाता है पढ़ना मुमकिन नहीं है क्योंकि यह सब आटोमैटिक मशीनों से होता है अब इसका शरई हुक्म मुफ़्ती साहब अपनी सहूलियत के मुताबिक़ बता सकते हैं ।
खैर गोश्त के ताल्लुक़ से जिस क़दर एहतियात का हुक्म है उन सबको दरकिनार कर यह हलाल का धंधा चंगा है और इसके ज़रिए मोटा माल पीटा जा रहा है प्रथम दृष्टया यह सीधे तौर पर हलाल के नाम पर हराम कमाई जैसा कुछ दिखता है क्योंकि अगर ज़्यादा गहराई में पड़ताल की जाये तो मुसलमानों का धर्म भ्रष्ट करने के किए यह खेल चल रहा है और मुख्यमंत्री जी इसे रोकना चाहते हैं !!
अभी तक केएफसी का मुर्ग़ा कहाँ हलाल होता है इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई और मैकडॉनलट तथा पिज़्ज़ा हट का स्टेटस क्लियर नहीं है ऐसे में यहाँ मुर्गा खाना कैसा है यह विवेक का विषय है क्योंकि इनके पास तो इस तरह का कोई सर्टिफिकेट भी मौजूद नहीं होता ।
अब बात करते हैं इस हलाल सर्टिफ़िकेशन वाले धन का आतंकवाद में प्रयोग यह जो बात कही गई क्या इसका भी समर्थन किया जाए ? तो मेरा जवाब होगा बिल्कुल आप फिर कहेंगे इसके पीछे क्या तर्क है तो जवाब है और वह यह है कि यह करोड़ों रुपया भारत में हलाल सर्टिफिकेट हासिल कर लाया जा रहा है इसका उपयोग कहाँ हो रहा है जहाँ पहला सवाल ऐसा सर्टिफ़िकेट हर किसी को जारी करने वाली संस्था से बनता है कि इस रकम का क़ौम की बेहतरी के लिए कहाँ उपयोग हुआ इसका जवाब दिया जाए? दूसरा यह जो गौरक्षा दल फ़र्ज़ी बनाकर लोग घूम रहे हैं आए दिन पकड़े जाते हैं और जिनके लिए ख़ुद भारत के प्रधानमंत्री को कहना पड़ा गुंडे हैं उनको पोषित कौन कर रहा है ? आख़िर प्रतिबंधित पशु की गाड़ियाँ किन स्लॉटर हाउस में जा रही हैं ? यह हलाल सर्टिफ़िकेट हासिल किए हुए लोग कम दामों में इन अपराधी तत्वों से माल ख़रीद रहे हैं ऐसी रिपोर्ट आती रहती हैं तो मुख्यमंत्री जी की बात सही होती है कि फ़र्ज़ी हलाल सर्टिफिकेट से हराम का जो धन कमाया जा रहा है उससे आतंकवाद पोषित हो रहा है !
अपराधी तत्व धर्म रक्षकों का चोला ओढ़ कर सामाजिक ताने बाने को तार तार कर रहे हैं और इस तरह के कृत्यों में आए दिन पकड़े जा रहे हैं जबकि वास्तविक धर्म को मानने वाले सभी शांतिप्रिय लोगों का ऐसे अपराध से कोई लेना देना नहीं है अगर मुख्यमंत्री जी पूरे देश में हलाल सर्टिफिकेट पर बैन लगवा दें तो चुटकियों में गौहत्या जैसा अमानवीय और आपराधिक कृत्य रुक जायेगा और देश में माहौल खराब करने वाले आपराधिक प्रवत्ति के लोगों पर भी अंकुश लगेगा उनकी फीड लाइन काट दी जाएगी और इस तरह जहाँ देश में वापिस सफेद क्रांति आ जाएगी वहीं जैविक खेती को भी प्रोत्साहन मिलेगा लोग मिलावटी दूध घी पनीर से बचेंगे और मिलावटी मिठाई खाने से लोगों की मौतें नहीं होंगी ।
उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री जी द्वारा दिया गया वक्तव्य भारतीय मुसलमानों के हित में है और उन्हें ताक़त प्रदान करने वाला है मुख्यमंत्री जी इस फ़र्ज़ीवाड़े पर रोक लगाना चाहते है और माननीय प्रधानमंत्री जी को भी इस पर आगे बढ़ना चाहिए और पूरे देश में हलाल सेरिफ़िकेशन पर रोक लगा देनी चाहिए और जिन संस्थानों के पास यह मौजूद है तत्काल प्रभाव से उसे रद्द कर देना चाहिए यह देश हित में और पूरे विश्व के मुसलमानों के हित में एक बड़ा फैसला होगा ।अब बताइए मैं सही कह रहा हूँ अगर आप सहमत हैं तो खुल कर माननीय मुख्यमंत्री जी की बात के समर्थन में उतर जाइए फ़ायदा आपको बहुत होगा यक़ीन मानिए राजनैतिक लड़ाई में जीतने का तरीक़ा और सलीक़ा सीखिये वरना आप बाउंड्री के बाहर बैठ कर तालियाँ पीटने वाले बने रहेंगे ।






